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बद्रीनाथ धाम के कपाट भी खुले, चारधाम यात्रा शुरू

 चमोली। उत्तराखंड में स्थित चारधाम गंगोत्री-यमुनोत्री और केदारनाथ के बाद शुक्रवार को चारधाम का चौथा पड़ाव बद्रीनाथ के कपाट भी खुल गए। इसी के साथ ही चार धाम यात्रा का विधिवत आरंभ हो गया है। बद्रीनाथ को इस भू-लोक का आठवां बैकुंठ धाम भी कहा जाता है, जहां भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हालांकि चारधाम यात्रा के लिए भक्तों को इजाजत नहीं मिली है। लॉक डाउन की वजह से देशभर से श्रद्धालुओं के यहां आने पर रोक है।

करोड़ों हिंदुओं के आस्था के प्रतीक भगवान बद्री विशाल के कपाट शुक्रवार सुबह 4 बजाकर 30 मिनट पर ब्रह्ममुहूर्त में धार्मिक परंपरानुसार एक बार फिर से ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए हैं।

सुबह सबसे पहले कपाट खुलते ही भगवान बद्री विशाल की मूर्ति से घृत कंबल को हटाया गया। कपाट बंद होते समय मूर्ति पर घी का लेप और माणा गांव की कुंवारी कन्याओं के द्वारा बनाई गई कंबल से भगवान को ढका जाता है और कपाट खुलने पर हटाया जाता है। इसके बाद मां लक्ष्मी बद्रीनाथ मंदिर के गर्भ गृह से बहार आईं जिसके बाद भगवान बद्रीनाथ जी के बड़े भाई उद्धव जी और कुबेर जी का बद्रीनाथ मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश हुआ। इसी के साथ भगवान बद्रीनाथ के दर्शन शुरू हो गए।

कपाट बंद की अवधि में छह माह से जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए जाते हैं. हमेशा से पहले दिन अखंड ज्योति के दर्शनों के लिए भारी संख्‍या में श्रद्धालु धाम पहुंचते हैं। हालांकि इस बार लॉकडाउन के चलते श्रद्धालु नहीं पहुंच पाए मगर अखंड ज्योति 6 माह कपाट बंद के बाद यहां पर जलती रही. कपाट खुलने पर ज्योति को अखंड रखा जाता है। कपाट बंद होने के बाद भी यह जलती रहती है और कपाट खुलने पर सबसे पहले श्रद्धालुओं को यही दर्शन करने को मिलता है।

कल रवाना हुई डोलियां

 गुरुवार को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ रावल जी, उद्धव जी, कुबेर जी और गाडू घड़ा (तेलकलश) योग ध्यान बद्री मंदिर पांडुकेश्वर से बद्रीनाथ धाम पहुंचे। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते इस बार रास्ते में लामबगड़ और हनुमान चट्टी में देव डोलियों ने विश्राम नहीं किया। पांडुकेश्वर स्थित प्राचीन योग ध्यान बद्री मंदिर में सुबह पूजा-अर्चना के पश्चात सभी देव डोलियों ने रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और डिमरी पंचायत प्रतिनिधि हकूक धारियों के साथ श्री बद्रीनाथ धाम की ओर प्रस्थान किया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया और सभी लोगों ने मास्क पहने रखा।

ये हुए शामिल

कपाट खुलने के समय मुख्य पुजारी रावल, धर्माधिकारी भूवन चन्द्र उनियाल, राजगुरु सहित केवल कुछ लोग ही शामिल हो सके। इस दौरान मास्क के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। इससे पूर्व पूरे मंदिर परिसर को सैनिटाइज किया गया. कपाट खुलने से पूर्व गर्भ गृह से माता लक्ष्मी को लक्ष्मी मंदिर में स्थापित किया गया और कुबेर जी व उद्धव जी की चल विग्रह मूर्ति को गर्भ गृह में स्थापित किया गया।

रौनक नदारद

कोरोना महामारी के चलते इस बार जहां बद्रीनाथ जी के सिंह द्वार पर होने वाला संस्कृत विद्यालय के छात्रों का मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन भी नहीं हुआ, वहीं भारतीय सेना गढ़वाल स्कॉउट के बैंड बाजों की मधुर ध्वनि और भक्तों के जय बद्रीनाथ विशाल के जयकारे भी नहीं गूंजे।

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