Breaking News
Home / breaking / साल का आखिरी सूर्यग्रहण कल 11 अगस्त को, ग्रहण के मेलों में कुदरत के संदेशे

साल का आखिरी सूर्यग्रहण कल 11 अगस्त को, ग्रहण के मेलों में कुदरत के संदेशे

 

 

न्यूज नजर : इस वर्ष पृथ्वी और चन्द्रमा की छाया के खेल ने आकाश मंडल में काफ़ी हलचल मचा दी। विज्ञान को खुद अपने सिद्धांतों के अनुसार खोज करने और अनुसंधान करने के लिए विवश कर दिया। लोक मान्यताओ में इसे पृथ्वी पर भार अर्थात भावी अज्ञात भय के कारण अनिष्टकारी मानते हुए दान पुण्य ओर हर संभावित खतरे को टालने के लिए कर्म किये तो खगोल विज्ञान मात्र इसे पृथ्वी और चन्द्र की छाया का खेल ही मानते रहे।

भंवरलाल
ज्योतिषाचार्य एवं संस्थापक,
जोगणिया धाम पुष्कर

सत्य तो यह है कि इस वर्ष कुदरत ने ग्रहण के मेले लगाकर अपनी तरह तरह की लीलाओ का खेल पृथ्वी पर दिखा कर मानव को सदेशे दिये हैं कि हे मानव मेरे गुणों की दुनिया को कभी भी कोई जान नहीं सका और ना ही जान पायेगा। केवल घटनाक्रम के आधार पर अपने सिद्धांतों को स्थापित कर मेरे बारे में टीका टिप्पणी करेगा।

ग्रहण का अर्थ है किसी के अस्तित्व की समाप्ति।चाहे वो अस्तित्व कुछ समय के लिए है या हमेशा के लिए समाप्त हो। चन्द्र ग्रहण ओर सूर्य ग्रहण मे सूर्य ओर चन्द्रमा का अस्तित्व कुछ समय के लिए समाप्त होता हुआ नजर आता है और बाद में वो अपने मूल स्वरूप में आ जाता है।

 

इस वर्ष 2018 मे पृथ्वी पर सूर्य ओर चन्द्रमा के पांच ग्रहण होगे। इनमें से चार ग्रहण निकल चुके हैं और पांचवा ग्रहण 11अगस्त को होगा। इससे पूर्व 11 जनवरी 15 फरवरी 13 जुलाई तथा 27 जुलाई को हो चुके हैं और भले ही सारे ग्रहण भारत की भूमि मे नहीं दिखाई दिये फिर भी पृथ्वी पर इनके प्रभाव दूसरे देशों की धरती पर पडे है। प्रत्यक्ष ओर अप्रत्यक्ष रूप से भारत की भूमि भी इन सब प्रभावों से प्रभावित रहीं हैं क्योकि समूचे विश्व से हमारा किसी ना किसी प्रकार से धार्मिक सामाजिक आर्थिक राजनैतिक तथा शिक्षा के क्षेत्र में सम्बन्ध है।

 

ग्रहण भले ही किसी को प्रभावित कर पाया या नहीं तो भी प्रकृति ने समूचे विश्व को अपने आगोश में कैद कर लिया। अत्यधिक जल प्रलय बाढ़ भूकंप भूसखलन ज्वालामुखी अनावृष्टि भयंकर गर्मी और सूखे से पूरे विश्व को किसी ना किसी रूप में प्रभावित कर रखा है। आज विश्व की यह स्थिति हर विज्ञान ओर शास्त्रो को अपना बल दिखा कर यह संदेश देती है कि हे मानव इस सृष्टि को विनाश से बचा। अपने अंहकार से अजेय बनने के स्थान पर उन अपार जीवो का संरक्षण कर ओर मानव को गुलाम बना अत्याचार मत कर उनकों अनगिनत चिंताओं ओर पीडाओ से मुक्ति दिला। उनके दर्द को दबा मत व अपनी नीति ओर कूटनीति के खेल में सभ्यता ओर संस्कृति पर ग्रहण मत लगा।

Check Also

एसबीआई के सभी खाताधारकों को बदलवाने होंगे अपने एटीएम-कम-डेबिट कार्ड

नई दिल्ली। एसबीआई ने अपने सभी डेबिट कार्ड धारकों को पुराने एटीएम-कम-डेबिट कार्डों को बदलवाने …