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लॉकडाउन में करोड़ों रुपए की सीमेंट खराब, कारोबारी परेशान

जयपुर। लॉकडाउन में भवन निर्माण कार्य पर प्रतिबंध होने के कारण दुकानों-गोदामों में रखी करोड़ों रुपए की सीमेंट खराब हो चुकी है। इससे कारोबारियों सहित मकान बनवा रहे लोगों की नींद उड़ी हुई है।
प्रदेश में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की रात से ही लॉकडाउन लागू है। तब से ही भवन निर्माण कार्य बंद है। कई जगह चल रहे निर्माण कार्यस्थल पर लोगों ने महीनों पहले करोड़ों रुपए की सीमेंट मंगवाकर रखी है। इसके अलावा गोदामों और दुकानों में भारी मात्रा में सीमेंट रखी है। सवा महीने बाद भी सीमेंट काम नहीं आने से अब केवल पाउडर बनकर रह गई है।
खास बात यह भी है कि इस दौरान कई बार तेज बारिश होने से मौसम में नमी बढ़ गई। इससे भी सीमेंट की गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ा है। यह सीमेंट अब काम में लेने योग्य नहीं रह गई है।
लॉकडाउन के कारण सीमेंट कम्पनियों ने भी उत्पादन बन्द रखा है। बाहर जो सीमेंट है, वह गुणवत्ता खो चुकी है। उसमें गुठली पड़ने लगी है। आदमी जिंदगी में एक बार ही मकान बनवाता है। ऐसे में वह सीमेंट की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं कर सकता। भले ही लोगों के पास सीमेंट पड़ी है लेकिन उसकी गुणवत्ता और पकड़ कमजोर होने से अब उसे फेंकने के अलावा कोई चारा नहीं है।
लॉकडाउन हटने के बाद दुकानों में बिकने के लिए रखी सीमेंट खराब होने के बावजूद दुकानदार उसे ग्राहकों को बेचने से बाज नहीं आएंगे। वे ग्राहकों को गुमराह कर अपना माल निकलने की फिराक में होंगे। प्रशासन को खराब सीमेंट नष्ट करवानी चाहिए ताकि लोगों के साथ धोखाधड़ी नहीं हो।

चोरी छिपे बेच रहे घटिया सीमेंट

अजमेर के रामगंज इलाके में लॉकडाउन के बीच घटिया सीमेंट बेची जा रही है। घर में ही दुकान और गोदाम होने के कारण दुकानदार प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर सीमेंट सहित हार्डवेयर आदि का सामान बेच रहा है।
खास बात यह भी है कि कालाबाजारी करते हुए दुकानदार ने सीमेंट की कीमत डेढ़ गुना बढ़ा दी है जबकि घटिया सीमेंट फेंकने लायक है।

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