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फेसबुक की ‘फ्री बेसिक्स’ योजना में अडंगा

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इंटरनेट की दुनिया में पिछले कुछ दिनों से एक सवाल चल रहा है। सवाल यह है कि क्या फेसबुक की विवादास्पद ‘फ्री बेसिक्स’ इंटरनेट सेवा को भारत में लागू किया जाना चाहिए?

फेसबुक का दावा है कि इस योजना के जरिए वह भारत के मोबाइल उपभोक्ताओं को मूलभूत या बेसिक इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराना चाहता है। 7 जनवरी तक इस बारे में लोगों को अपने विचार ट्राई (दूरसंचार नियामक आयोग) को भेजना है। यदि आप इस बारे में अपना विचार रखना चाहते हैं तो advisorfeav@trai.gov.in पर ईमेल करिए।
दूसरी ओर अन्य कंपनियां इस योजना में अडंगा लगा रही हैं।

फेसबुक का दावा है कि ‘फ्री बेसिक्स’ योजना के माध्यम से भारत के ग्रामीण इलाकों के गरीब मोबाइल उपयोगकर्ताओं को मुफ्त इंटरनेट उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के तहत शिक्षा, हेल्थकेयर व रोजगार जैसी सेवाएं मोबाइल फोन पर ऐप के जरिए नि:शुल्क (बिना किसी डेटा योजना के) दी जाएंगी। इस प्लेटफॉर्म के लिए विशेष रूप से ऐप्स बनाए गए हैं।

फेसबुक ने भारत में फ्री बेसिक्स सुविधा के लिए रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के साथ समझौता किया है। दिसंबर 2015 में ट्राई ने रिलांयस कम्युनिकेशंस से इस सेवा को अस्थायी तौर पर स्थगित रखने के लिए कहा था। इसी साल फरवरी में फ्री बेसिक्स को 6 राज्यों में Internet.org नाम से लॉन्च किया गया था।

देशभर में इस योजना की आलोचना शुरू हो गई। इसे नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांत का उल्लंघन भी माना जा रहा है।

क्या है नेट न्यूट्रैलिटी

नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि कोई भी उपयोगकर्ता इंटरनेट को बिना किसी रोक या नियंत्रण के इस्तेमाल कर सके। इसके साथ यह किसी एक खास कंपनी द्वारा संचालित ना हो।

क्‍या है फ्री बेसिक्स

इस योजना में उपभोक्ता कुछ वेबसाइट्स को नि:शुल्क एक्सेस कर सकते हैं। लेकिन यूट्यूब, गूगल या ट्विटर जैसी कई अन्य वेबसाइट्स को इस योजना में नहीं देखा जा सकता है। यानी मोबाइल यूजर को इन वेबसाइट्स को एक्सेस करने के लिए अलग से फीस चुकानी होगी। प्रीपेड यूजर्स के लिए यह इंटरनेट वाउचर की तरह होगा, तो पोस्टपेड यूजर्स के मासिक बिल में यह शुल्क जुड़कर आएगा।

भारत के नौ बड़े स्टार्ट अप के संस्थापकों ने ट्राई को चि_ी लिखकर इंटरनेट की निरपेक्षता बरकरार रखने की अपील की है। इस मुहिम में आईआईटी के करीब 40 प्रोफेसर भी शामिल हैं।

नए कानून की तैयारी में सरकार

दूसरी ओर, नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर छिड़ी इस बहस के बीच केंद्र सरकार नया कानून लाने पर विचार कर रही है, जिससे टेलीकॉम और इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों द्वारा दी जा रही मुफ्त सेवा का संचालन किया सके।

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