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मायावती का नया पैंतरा, अगड़ों के लिए आरक्षण मांगा


नई दिल्ली। अब तक दलितों की हमदर्द बनकर सत्ता का भरपूर सुख भोग चुकीं बहुजन समाजवादी पार्टी प्रमुख मायावती ने अब नया पॉलिटिकल कार्ड खेला है। उन्होंने सोमवार को आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देने की मांग की। बसपा प्रमुख मायावती ने जीएसटी पर सरकार को समर्थन देने की बात भी कही। साथ ही केन्द्र सरकार पर सीबीआई के दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
मायावती ने राज्यसभा में डॉ. बी आर अंबेडकर की 125वीं जयंती पर ‘भारत के संविधान के प्रति प्रतिबद्धता’ पर चल रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि अगर सरकार देश के विकास के लिए और समाज के हर वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए कदम उठाएगी तो उनकी पार्टी सरकार का साथ देगी।

जीएसटी विधेयक का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि अगर आपको (सरकार को) इस बात का पूरा भरोसा है कि जीएसटी कानून से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा तो हमारी पार्टी इस विधेयक को समर्थन देगी और इसके एवज में एक कप चाय तो क्या, एक गिलास पानी की भी हम आपसे अपेक्षा नहीं रखते।
बसपा प्रमुख ने दलितों और जनजातीय समुदाय के लोगों को सरकारी व निजी क्षेत्रों में पदोन्नति में आरक्षण और सवर्णों को भी आर्थिक आधार पर आरक्षण का लाभ देने की बात कही। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संविधान पर हुई चर्चा के अंत में काफी बातें कहीं। यह बेहतर रहा होता अगर उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण, निजी क्षेत्र में आरक्षण, सवर्णो में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आरक्षण जैसी समाज के कमजोर तबकों को लाभ पहुंचाने वाली अच्छी योजनाओं का ऐलान किया होता। प्रधानमंत्री ऐसा करते तो यह डॉ. अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होती।

सीबीआई का दुरूपयोग
मायावती ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने सीबीआई का दुरूपयोग कर उन्हें फंसाने की कोशिश की है। इस बार भी भाजपा वही हथकंडा अपना रही है, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पायेंगे। उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव होने में लगभग एक वर्ष रह गया है जिसके कारण उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना में हुये घोटाले में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। वाजपेयी की सरकार के दौरान भी उन्हें ताज कॉरीडोर घोटाले में सीबीआई ने फंसाने का प्रयास किया था लेकिन उच्चतम न्यायालय से उन्हें इस मामले में न्यायालय मिला था।
भाजपा पर हिन्दूवादी एजेंडा लागू कराने का आरोप लगाते हुए बसपा नेता ने कहा कि 2002 के उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में बसपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था जिसके कारण उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर सरकार बनना पड़ा था। कुछ दिनों बाद ही हिन्दुवादी मानसिकता को यह अच्छा नहीं लगा और उन्होंने अपना एजेंडा लागू करने का प्रयास किया। इसके बाद उन्होंने 2003 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।