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अस्पताल में नहीं मिला इलाज, मासूम की लाश गोद में लेकर 16 किलोमीटर चला पिता


कोटा। वसुंधरा राज में लापरवाह डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलन्द हैं। सरकार से मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी कई डॉक्टर अस्पताल में मरीजों को आसानी से नहीं देखते हैं। ऐसे ही एक डॉक्टर की वजह से राजस्थान सरकार पर भी ‘दाना मांझी’ जैसा कलंक लगा है।


आदिवासी बहुल बारां जिले में उपचार के अभाव में 7 माह के एक बच्चे की मौत हो गई। जिले के चैराखाड़ी गांव निवासी राजेश के 7 माह के बच्चे की सोमवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। गरीब परिजन 16 किलोमीटर दूर शाहबाद स्थित सरकारी अस्पताल में बच्चे को लेकर पहुंचे।

लेकिन यहां धरती के भगवान ने अपनी ड्यूटी खत्म होने की बात कहते हुए बच्चे को देखने से साफ इंकार कर दिया। बच्चे के पिता ने दुहाई दी लेकिन डॉक्टर साब नहीं माने।

उन्होंने यह कहते हुए साफ इंकार कर दिया कि अब मेरी ड्यूटी खत्म हो गई है। या तो शाम 5 बजे मेरे घर दिखाने आना या फिर बच्चे को बारां जिला मुख्यालय ले जाओ। चिकित्सक के इंकार करने के बाद परिजन बच्चे को अस्पताल में ही लेकर बैठे रहे। इसी बीच बच्चे ने दम तोड़ दिया।

नहीं मिली एम्बुलेंस

बच्चे की मौत के बाद गरीब परिजन ने सरकारी एम्बुलेंस मांगी तो ड्राइवर ने पेट्रोल होने से इंकार कर दिया। परिजन ने नर्सिग कर्मियों से मदद मांगी, लेकिन सभी ने इंकार कर दिया। इस पर परिजन शाहबाद से वापस अपने गांव चौराखाड़ी तक 16 किलोमीटर बच्चे के शव को गोद में लेकर ही लौट गए।

मालूम हो कि राज्य में मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए तो एम्बुलेंसें दौड़ रही हैं लेकिन जरूरतमंद को उनके परिजन की लाश घर ले जाने के लिए यह सुविधा नहीं मिलती है। सभी विभागों में सरकारी गाड़ियां भले ही अफसरों के घर के काम में दौड़ती हो लेकिन गरीब के लिए कोई सुविधा नहीं है।

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